यहाँ से वहां तक कैसा इक सैलाब है

अभिव्यक्ति यहाँ से वहां तक कैसा इक सैलाब है मेरे तो चारों तरफ आग ही आग है!! कितनी अकुलाहट भरी है जिन्दगी हर तरफ चीख-पुकार भागमभाग है!! अब तो मैं अपने ही लहू को पीऊंगा इक दरिंदगी भरी अब मेरी प्यास है!! मेरे भीतर तो तुम्हे कुछ नहीं मिलेगा मुझपर ऐ दोस्त अंधेरों का... [पूरी पोस्ट]
writer gargi gupta
views
28
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
9
[02 Dec 2009 00:21 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix