क्रोध को दबाइए मत!

ओशो चिन्‍तन शरीर मात्र साधन है। उसके संबंध में कोई दुर्भाव मन में न रखें। ऐसी बहुत-सी बातें प्रचलित हो गयी हैं कि शरीर दुश्मन है, और शरीर पाप है, और शरीर बुरा है, और शत्रु है, और इसका दमन करना है। वे मैं आपको कहूं, गलत हैं। न शरीर शत्रु है, न शरीर मित्र है। आप उ... [पूरी पोस्ट]
writer राजेंद्र त्‍यागी

धर्म-अध्यत्मिचन्‍तन

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[01 Dec 2009 18:03 PM]

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