हीरा

feminist poems अपने बाबूजी की थी मैं अनगढ़ हीरा सँवारा , तराशा बनाया मुझे , बनाकर मुझको एक अनमोल हीरा अपनी ही चमक से चमकाया मुझे , अपने माँ की थी मैं जिद्दी बिटिया डाँटा-डपटा , समझाया मुझे , दुनियादारी की बातें बताकर रानी बिटिया बनाया मुझे , जब बड़ी हुयी तो बड़े जत... [पूरी पोस्ट]
writer mukti
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[01 Dec 2009 15:38 PM]

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