मैं रोता हूँ, तो रो लेने दो !!

जीवन के पदचिन्ह बड़ी मुद्दत के बाद आज तन्हा हूँ, मैं रोता हूँ, तो रो लेने दो !! आंसू न पोछो, मुझे धीर न दो मैं रोता हूँ, तो रो लेने दो !! अपनों  को परखने की, मुझको न थी आदत ही कभी, वो छलतें है मुझको, तो छल  लेने दो.   माँगा ही... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

जीवन के रंग

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[01 Dec 2009 14:00 PM]

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