अवधी उपन्यास - क़ासिद (1)
मुर्गा अबै बांग नाई दीन्हेसि तेहिते पता चलति है कि भोरहरे म अबै देर। लेकिन, दाद देयक होई पंडिताइन कि जे भोरहरे ते पहिले है नहा धोक पहुंत जाती हैं शीतला माता क मंदिर। शीतला माता क नहावे ते पहले वै पहुंचती हैं बगल म अंग्रेजन के जमाने के बने सिवाला पर।...
[पूरी पोस्ट]
पंकज शुक्ल
26
3
0
3
7
[01 Dec 2009 11:21 AM]



Shuffle








