अवधी उपन्यास - क़ासिद (1)

अवधी क्यार पहिला ब्लॉग मुर्गा अबै बांग नाई दीन्हेसि तेहिते पता चलति है कि भोरहरे म अबै देर। लेकिन, दाद देयक होई पंडिताइन कि जे भोरहरे ते पहिले है नहा धोक पहुंत जाती हैं शीतला माता क मंदिर। शीतला माता क नहावे ते पहले वै पहुंचती हैं बगल म अंग्रेजन के जमाने के बने सिवाला पर।... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज शुक्ल
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[01 Dec 2009 11:21 AM]

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