धीरे-धीरे वंशी की धुन, चुरा रही है मेरा दिल
धीरे-धीरे वंशी की धुन, चुरा रही है मेरा दिल धीरे-धीरे वंशी की धुन, चुरा रही है मेरा दिल कहाँ छुप गया मनमोहन तू, जली जा रही मैं तिल तिल धीरे-धीरे वंशी की धुन, चुरा रही है मेरा दिल.............. सुनकर ये आवाज़ निराली, दिल धक् धक् करने...
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योगेश स्वप्न
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[01 Dec 2009 10:31 AM]



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