अबोध सपना- श्री सतीश चन्द्र झा
श्री सतीश चन्द्र झा जीवन केर विस्तृत नील पटल बादल बनि किछु हमहूँ लिखितौं। उगितै जौं चान अमावसक अपने अँगना हमहूँ नचितौं । छल उमर अबोधक कतेक नीक , संघर्ष कतहु, नहि कतहु द्वेष सागर सन सौंसे पथ विशाल जा सकी जतय, नहि कतहु शेष। कवि- श्री सतीश चन्द्र झा , व...
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सम्पादक: कतेक रास बात
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[01 Dec 2009 10:30 AM]



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