एक किताब और एक फ़िल्म के बहाने इंसानी जज़्बात के हज़ार रंग
इंसानी जज़्बात तमाम चीज़ों से बेतरह प्रभावित होते रहते हैं। किताब के पन्ने और सिनेमा के पर्दे पर न जाने कितने एहसास, कितनी बार ख़ूब बारीकी से छिटकाए गए हैं। लेकिन आज मैं आपसे उस किताब और फ़िल्म का ज़िक्र कर रहा हूं जिसने इन जज़्बातों को कुछ इस क़दर छ...
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[01 Dec 2009 08:53 AM]



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