क्या हुआ गर ला इलाज हूँ,

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... गुज़रा है ज़माना इस बंद कमरे में टूटे हैं पंख मेरे फड-फाड़ा के बंद कमरे मे. क्या हुआ गर ला इलाज हूँ, स्वप्न नहीं रुके हैं मेरे इस बंद कमरे मे. सींचता हूँ रूह अपनी अनगिनत उन यादों से शब् टपकती है कमल पे डब-डबती उन यादों से. क्या हुआ गर ला इलाज हूँ, यादे... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

My Poems

views
21
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[01 Dec 2009 06:31 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix