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लेखन भले ही ऐकांतिक कार्य हो लेकिन उसकी एक महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका भी है। रचना का पाठक तक पहुंचना निश्चित रूप से एक सामाजिक गतिविधि है। आज हिंदी लेखक बहुत ज्यादा हाशिए पर आ गया है। उसकी प्रासंगिकता का भी संकट खड़ा हो रहा है , जबकि अगर आज की शब्दावल...
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anup
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[01 Dec 2009 01:27 AM]



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