एक व्यंग्य : तितलियाँ ज़िंदा हैं...........

हँसते रहो हँसाते रहो एक व्यंग्य : तितलियाँ ज़िन्दा हैं.. जब से अस्थाना साहब इस विभाग में स्थानान्तरित होकर आये हैं काफी उदास रहते हैं।उदास रहने का कोई प्रत्यक्ष कारण तो नहीं था।फिर भी उन्हें अन्दर ही अन्दर कुछ न कुछ कमी महसूस होती थी।कहने को विभाग ने तो प्रोन्नति देकर यहा... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[01 Dec 2009 01:21 AM]

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