" मन की ओस की गर्म बुँदे "

कुछ लम्हे मन की ओस की गर्म बुँदे " एक लम्हा जुदा होने से पहले, उँगलियों के पोरों के आखिरी स्पर्श का वही पे थम जाता तेरा एहसास बन मुझ में समा जाता अपनी पूर्णता के साथ मै कुछ देर और जी लेती.... Subscribe to kuchlemhe by Email... [पूरी पोस्ट]
writer seema gupta
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[30 Nov 2009 23:24 PM]

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