सवाल नहीं है आज

जो देखा भूलने से पहले सवाल नहीं है आज सुनकर उठता है सवाल इस बात पर , मैं अब आकाश को नहीं ताकता पैरों को घूरता हूँ मुझे करनी थी प्रतीक्षा उनकी इस पल यहीं इस एकांत में इस कोलाहल में इस चुप्पी में अपने भीतर इस चीख में यहीं इस खुशी में इस क्रोध में इस उदासीन समय की करवट में य... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन राणा - Mohan Rana
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[30 Nov 2009 18:40 PM]

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