अबे! साले, हंस क्यूँ रहा है?

मेरी रचनाएँ एक और बड़ा अच्छा वाक़या याद आया है। बात उन दिनों की है जब मैं दसवीं क्लास में पढता था..... हमारे एक इतिहास के टीचर हुआ करते थे.... उनका नाम तो याद नही आ रहा है..... पर लंगूर नाम से पूरा स्कूल उनको जानता था.... यह नाम भी उनका इसलिए पड़ा था.... क्यूंकि... [पूरी पोस्ट]
writer महफूज़ अली
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[30 Nov 2009 09:35 AM]

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