नारी मुक्ति का ये छदम प्रपन्च

कुछ ईधर की, कुछ उधर की आज जिधर देखो उधर ही नारी के कष्टों, उसके पहनावे, शरीर रचना और उसके अधिकारों की कथाएँ बाँची जा रही है, जबकि पुरूष की समस्याओं की ओर किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा। जब कि समस्याएं दोनों ओर हैं। जब तक दोनों की समस्याएं अलग अलग रहेंगी ओर नारी अपनी सुविधा,... [पूरी पोस्ट]
writer पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[30 Nov 2009 09:17 AM]

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