ग़ज़ल - फ़क़त ये है दुआ रब से
फ़क़त ये है दुआ रब से मेरा रिश्ता रहे सब से हुईं कुछ ग़लतियाँ जब से सुधरने मैं लगा तब से दुआ दिल से निकलती है कही जाती नहीं लब से उजाले तक पहुँचने को गुज़रना पड़ता है शब् से मेरे अहबाब पूछे हैं तू शायर हो गया कब से .... कवि दीपक गुप्ता 9811153282, 931...
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kavideepakgupta
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[30 Nov 2009 08:51 AM]



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