भाषा की लड़ाई की आड़ में

भोर सृजन संवाद कांग्रेस को नये नये दैत्य पैदा करने और उनसे खेलने का पुराना शोक है। ये दैत्य पहले तो उसके अपने अंदर की कलह से पैदा होते और उन्हीं से निपटने के काम आते थे। चाहे भिण्डरांवाले हों या बाल ठाकरे। लेकिन इस बार मनसे का नया दैत्य उसने शिवसेना की काट के लिए प... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मिश्र

राजेश जोशी

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[30 Nov 2009 04:51 AM]

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