तूने आज जब वो मेरे लिखे ख़त जलाए होंगे..
आज मुझे भूलने के बाद, जब वो मेरे ख़त तूने जलाए होंगे फ़िज़ाओ में आज भी वो बीते पलो के साए महक आए होंगे बिताए थे ना जाने कितने बेहिसाब लम्हे साथ साथ उनके तस्वुर ने तेरे होश एक बार फिर से तो उड़ाए होंगे याद आया होगा तुझे भी मेरा ,तेरी बाहों में सिमाटना...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[30 Nov 2009 02:53 AM]



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