जिंदगी के रंग- नीरज जी के संग
संघर्ष का रंग- उंगली का दर्द बचपन के कितने अच्छे होते हैं। इन पंक्तियों को पढ़ते समय हम केवल बचपन की शरारतों को ही याद रखते हैं, संघर्षों को भूल जाते हैं। मेरा बचपन शरारत कम, संघर्षों में ज्यादा बीता है। पिताजी उन दिनों ट्रक चलाया करते थे। महीन...
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सुशील कुमार छौक्कर
जिंदगी के रंग
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[29 Nov 2009 23:17 PM]



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