किसी ने कहा ओ पिया
रोशनी के चिबुक पे डिठौना लगा रात जा छुप गई चाँदनी की गली ओस की बून्द से बात करते हुए मुस्कुराने लगी इक महकती कली रश्मियां जाग जर नॄत्य करने लगीं गीत गाने लगी गुनगुनाकर हवा पूछने लग गईं क्यारियाँ बाग में क्या हुआ क्या हुआ क्या हुआ क्या हुआ नीम की शाख...
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राकेश खंडेलवाल
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[29 Nov 2009 20:51 PM]



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