रूप जगाए इच्छाएं

dr ashok priyaranjan डॉ. अशोक प्रियरंजन तुम्हारी आंखों में देखे हैं मैने हजारों सपने, जिंदगी का हर पल महकता रहता है तुम्हारे सपनों से, खुशियां खिलती हैं फूट पड़ती हैं उनसे इंद्रधनुषी सपनों की बेशुमार किरणें, तब मन में जन्म लेती है एक इच्छा, इन सपनों में भर दूं अपने सपनों... [पूरी पोस्ट]
writer dr. ashok priyaranjan
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[29 Nov 2009 14:56 PM]

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