वो गुल्लक फ़ोड आया!!

मेरे विचार, मेरी कवितायें कुछ दुआये मै एक गुल्लक मे रखता था.. चन्द कौडिया थी, रहमतो मे लिपटी हुयी.. बुजुर्गो ने बरकते दी थी..       उस बूढे फ़कीर ने, जब सर पे हाथ रखा, दुआ दी कि एक अच्छे इन्सा बने रहना… वो सारी कौडिया मै उसके कासे मे डाल आया….. आज… आज मै वो गुल्... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay
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[29 Nov 2009 14:14 PM]

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