गीत
एक सागर की कथा है , जिंदगी मुझमे व्यथा है // बह रहा हूँ धार सा मै , जूझता मंझधार सा मै , घूमता फिरता रहा हूँ , हवा में तिरता रहा हूँ , मन की पाती पर लिखा जाने कहाँ ,किसका पता हूँ ? ऊबता दिनरात हूँ मै , थकित झंझा वात हूँ मै , समर में...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[29 Nov 2009 13:39 PM]



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