मै कलमा पढ़कर सुरैया नही बनाना चाहती
यह कविता गुजराती की मशहूर कवियत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सरूप बेन की है। इसे गुजराती से हिन्दी में अनुदित मैंने किया है...बाकी तो बात ही बोले तो बेहतर ) क्या है वज़ह मेरे जीने की नहीं मै क़लमा पढकर सुरैया नहीं बनना चाहती क्योंकि इस देश की तमाम सुरैया,...
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अशोक कुमार पाण्डेय
गुजराती
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[29 Nov 2009 13:29 PM]



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