मेरा कुछ सामान
दोस्तों ,बहुत दिनों से कुछ उलझा हुआ था ज़िन्दगी की कशमकश में , और अब , जब लगने लगा की ,मुझमे और मेरी कविताओ में दूरी बढ़ते जा रही है ,तो आज कुछ लिखा ! इस छोटी सी नज़्म को आपकी महफ़िल में नज़र करता हूँ , और उम्मीद करता हूँ की ,हमेशा कि तरह ,आप सभी अपना प...
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Vijay Kumar Sappatti
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[29 Nov 2009 09:42 AM]



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