आत्मालाप
चुप रहना और ठहरना दो अलग चीजें हैं। दोनों को एकाकार करना सीख रहा हूं। कितना अलग लगता है चुप रहना और फिर कहीं देर तक ठहर जाना। इन दोनों अवस्थाओं में, हम खुद से कितनी ईमानदारी बरतते हैं या खुद से कितना बेईमान हो जाते हैं। अक्सर रातों में उठकर इन अवस्था...
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गिरीन्द्र नाथ झा
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[29 Nov 2009 06:37 AM]



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