डायरी के कुछ पन्‍ने--'मां के जाने के बाद' ।

बतकही मां के अवसान को मन जैसे पूरी तरह स्‍वीकार नहीं कर पाया है । कंप्‍यूटर पर उनकी तस्‍वीर देखूं तो अचानक ही 'इनसे' कहने लगती हूं कि मां ऐसा कहती हैं, वो वैसा कहती हैं । 'हैं' से उनके अचानक 'थीं' हो जाने को कैसे स्‍वीकार करूं । इन दिनों जो डायरी लिखी, उसक... [पूरी पोस्ट]
writer ममता सिंह
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[29 Nov 2009 04:14 AM]

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