एक डिस्टर्ब्ड जिन्न

बैठक Baithak रात के दस बज चुके तो मैंने चैन की सांस ली कि चलो भगवान की दया से आज कोई पड़ोसी कुछ लेने नहीं आया। भगवान का धन्यवाद कम्प्लीट करने ही वाला था कि दरवाजे पर दस्तक हुई, एक बार, दो बार, तीन बार। लो भाई साहब, अपने गांव की कहावत है कि पड़ोसी को याद करो और पड़ोस... [पूरी पोस्ट]
writer नियंत्रक । Admin

vyangya

views
34
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[29 Nov 2009 02:51 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix