...हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएंगे

साहित्‍य - संस्‍कृति ईटीसी दुष्यंत कुमार की गजलें बहुत कुछ सोचने को विवश करती हैं। नई दिल्ली से प्रकाशित एक राष्ट्रीय दैनिक में शुक्रवार को प्रकाशित उनकी गजल मुझे तो काफी अच्छी लगी, शायद आपको भी भाए। डालिए एक नजर...... मेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आएंगे, इस बूढ़े पीपल की... [पूरी पोस्ट]
writer manglam
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[28 Nov 2009 14:57 PM]

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