प्यार तब और बढ़ा

मेरी ग़ज़लें, मेरे गीत/प्रसन्न वदन चतुर्वेदी मित्रों!अपने तीन ब्लाग मेरी गज़लें,मेरे गीत और रोमांटिक रचनायें को इस एक ही ब्लाग में समेटने के बाद मैंने रोमांटिक रचनायें कम ही पोस्ट की है । इस बार एक गीत प्रस्तुत है- प्यार तब और बढ़ा और बढ़ा और बढ़ा, जब लगाये गये पहरे प्यार के ऊपर..... कोई अनारकली दी... [पूरी पोस्ट]
writer प्रसन्न वदन चतुर्वेदी
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[28 Nov 2009 12:47 PM]

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