मेरी याद में देखना परेशाँ तुम होगे - ग़ज़ल

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh अभी हाल ही में मेरे किसी शुभचिंतक ने मुझे मुफ्त की सलाह बांटने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. मैं परेशान, आख़िर मान लिया की गलती मेरी ही है. जाने अनजाने कुछ शे'र लिखे चले गए. आज की यह ग़ज़ल उसी शुभचिंतक के नाम पेश है - अपनी जमीं के वास्ते आसमां तुम होग... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ सतरंगी

ग़ज़ल

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[28 Nov 2009 11:05 AM]

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