'लौ' रौशन हो रही थी...

सरपंच एक लौ रौशन करना मक़सद था..। याद आ रहे थे पिछले साल के वो लम्हें जब आंखों से शहीद एनएसजी मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पार्थिव शरीर पर उनकी मां को बदहवास, रोते-बिलखते देखा था... उन इमोशन्स को कैश करवाने के लिए मुझे दृश्यों को "लुका-छिपी बहुत हुई, सामने आ... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश त्रिपाठी
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[28 Nov 2009 10:56 AM]

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