जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई...

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी चैन से जीने की सूरत ना हुई! जिसको चाहा उसे अपना ना सके जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई!! जिससे जब तक मिले दिल ही से मिले दिल जो बदला तो फसाना बदला! रस्में दुनिया की निभाने के लिए हमसे रिश्तों की तिज़ारत [1] ना हुई!! दूर से था वो... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम

क्षणिकाएं

views
20
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[28 Nov 2009 10:53 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix