जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई...
कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी चैन से जीने की सूरत ना हुई! जिसको चाहा उसे अपना ना सके जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई!! जिससे जब तक मिले दिल ही से मिले दिल जो बदला तो फसाना बदला! रस्में दुनिया की निभाने के लिए हमसे रिश्तों की तिज़ारत [1] ना हुई!! दूर से था वो...
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रामकृष्ण गौतम
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[28 Nov 2009 10:53 AM]



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