भेद

मिरीचिका क्यों कभी कभी ऐसा है लगता, पीठ से मेरे यह लहू सा टपकता, लहू जो किसी घाव से है निकला, घाव जो किसी खंजर से है मिला, खंजर जो किसी हाथ ने था चलाया, हाथ जो मेरे किसी अपने ने बढ़ाया, मेरे अपने जो मेरे गले से लिपटे, गले से लिपटे क्योंकि प्रिय थे मेरे, प्रिय... [पूरी पोस्ट]
writer विजय प्रकाश सिंह
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[28 Nov 2009 05:58 AM]

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