I-Next में आज प्रकाशित व्यंग्य- मुहब्बत के तराने
ज्यादा वक्त नहीं गुजरा जब आशिक बड़ी मुहब्बत से ख़त लिखा करते थे। नया नवेला आशिक प्रेम पत्र को रोमांटिक बनाने के लिए हिन्दी साहित्य में डूब जाया करता था। ग़ालिब से लेकर मीर तक की शायरी के दरिया में तैर जाया करता था। कुछ जुनूनी किस्म के पागल प्रेमी लहू...
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पीयूष पाण्डे
व्यंग्य
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[28 Nov 2009 04:35 AM]



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