शब्द यदि झुक गए !
शब्द जब बध गये छन्द में तो “घनत्व” कैसे करेंगे वहन ? शब्द जब ढल गये छन्द में तो झेलेगे कैसे अपने अर्थों की गुह्य अंतःक्रियायें ? शब्द जब झुक गये छन्द में तो सहेगें कैसे वाक्य विन्यास की कोठर--पैठी नयी विकसती अर्थ भंगिमायें ? तब की बात कुछ और थी , अब...
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Aarjav
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[28 Nov 2009 03:18 AM]



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