रास्ता और वो

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का सोचा था .....खुद को दूर रखेगे ब्लॉग से....नहीं लिखेंगे कोई रचना ....ब्लॉग्गिंग से दूसरे जरूरी कार्यों पर असर होता है .....पर कविता कहाँ दूर रहती है आपसे ... वो तो हर पल साथ होती है कभी जिंदगी, कभी साया, कभी तजुर्बा तो कभी हमसफ़र बनकर .....नहीं रख पाए... [पूरी पोस्ट]
writer Priya
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[28 Nov 2009 02:13 AM]

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