हवा के झोंके में तुम्हारी याद ...........................कविता

मीडिया व्यूह हवा के झोंके ने बंद पन्नों को बिखेरा है , आज फिर से , जिसमें तुम्हारी चंद यादें फिसल गयी, फर्श पर आंखों के मोती बनकर । मैंने रोकना चाहा खुद को पर नाकाम ही रहा , तुम्हारी तस्वीर पर पड़े आंसू ने महसूस करना चाहा था तुम्हारे स्पर्श को , तुम्हारी खुश्बू क... [पूरी पोस्ट]
writer neeshoo

.कविता

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[28 Nov 2009 02:00 AM]

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