अब सवाल ज्यादा सुकून देते हैं.
मुझे पता है कि मै बस लिखने लगता हूँ. ईमानदारी से मुझे शिल्प का अभ्यास नहीं है. गलतियाँ बर्दाश्त करियेगा..और बदले में मुझे एक मुस्कान दीजियेगा... अब सवाल ज्यादा सुकून देते हैं. अब सवाल ज्यादा सुकून देते हैं. राख, शोलों से ज्यादा जुनून देते हैं. यार तु...
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श्रीश पाठक 'प्रखर'
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[28 Nov 2009 00:55 AM]



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