दिल की बस इतनी खता है
दिल की बस इतनी खता है वो तुझे ही चाहता है जिन्दगी है, या सजा है वक्त कितना बेवफ़ा है दिल की बस इतनी खता है वो तुझे ही चाहता है प्यार जब ग़म की दवा है रूह फिर क्यों ग़मजदा है सिर्फ़ सच ही तो कहा था हो गया वो क्यों खफ़ा है जुल्म सहना, मुस्कराना आपकी बेढ़ब...
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श्याम सखा 'श्याम'
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[27 Nov 2009 22:14 PM]



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