तेरे नाम चदरिया
जनम जनम को मैंने ओढ़ी ,तेरे नाम चदरिया , पिजरे जैसी चादर तेरी,घर के अन्दर रैन अँधेरी , पड़ी रहू तो पीर घनेरी ,उड़ पाउं यह शक्ति न मेरी, तरसा करे वियोगी पंछी ,बरसा करे बदरिया । कुछ नासमझ सी बुद्धि लरकैया, उस पर दुनिया भूल भुलैया, रखा जाय हाथ न पैयां ,जल...
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radhasaxena
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[27 Nov 2009 19:09 PM]



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