'लव जिहाद' कट्टर दिमाग की उपज
काफी दिनों से मैं अंतरजाल से दूर रहा . इन दिनों पुरानी मेल्स देख रहा हूँ । यहाँ मुझे बिहार अंजुमन नामक एक ग्रुप की मेल मिल गई . पेशे से पत्रकार और सशक्त हिन्दी कवि संजय कुंदन की इस रपट को आप लोगों के सामने लाना ज़रूरी इसलिए कि क्या ऐसा भी मुमकिन है !...
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शहरोज़
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[27 Nov 2009 14:10 PM]



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