उदास गिटार और एक स्‍थगित धुन

उनींदरा प्रेम तब भी बाक़ी थी जब एक परित्‍यक्‍त पल में गिटार सहेज कर रख दिया गया। उसकी उदासी हमारी आंखों से ज्‍़यादा नम थी। आवाज़  देकर अगर उसने रुकने को कहा होता तो शायद अच्‍छा था...। आहूत धुनों की शर्मिन्‍दगी से आंख बचाते हुए हमने सारी हरी कोमल पत्तियो... [पूरी पोस्ट]
writer शायदा
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[27 Nov 2009 12:21 PM]

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