उससे फर्क ही क्या पड़ता है ?
२६/११ की दुखद याद के संदभ में उस इस्राइली मासूम को देखकर लिखी गई कविता, जब सारे अखबारों में वही रोता हुआ बच्चा छाया हुआ था, मेरे छोटे से मोहल्ले में रहने वाली महिलाएं भी उस बच्चे को देखकर रो पड़ी थीं, और मैंने उससे कुछ दिन पहले ही उस बच्चे की तस्वीर द...
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Shefali Pande
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[27 Nov 2009 08:47 AM]



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