कितने जगह मनाओगे शहीदी दिवस को ?

कुछ सोंचा कुछ बाक़ी है चौको न बस सोचो ज़रा ये क्या हो गया संचित सदा की एकता का साख खो गया कैसी घड़ी , समय दुखद , मानव संघार का थी स्वाग ताकांक्षी धरा दानव चिग्घाड़ का ॥ १॥ घटना न कभी ऐसी स्वतंत्र हिंद में हुई रो पड़े जिसने भी उस हालत को सुनी आँखे खुली थी जिनकी वो भी सूर हो ग... [पूरी पोस्ट]
writer anilpandey
views
20
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[27 Nov 2009 06:32 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix