कितने जगह मनाओगे शहीदी दिवस को ?
चौको न बस सोचो ज़रा ये क्या हो गया संचित सदा की एकता का साख खो गया कैसी घड़ी , समय दुखद , मानव संघार का थी स्वाग ताकांक्षी धरा दानव चिग्घाड़ का ॥ १॥ घटना न कभी ऐसी स्वतंत्र हिंद में हुई रो पड़े जिसने भी उस हालत को सुनी आँखे खुली थी जिनकी वो भी सूर हो ग...
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anilpandey
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[27 Nov 2009 06:32 AM]



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