अब मैं नहीं याद करता तुम्हें

फ़लसफा : ज़िंदगी का अब मैं नहीं याद करता तुम्हें बरस बीते मिले थे हम दूर देश में | एक और देश में दूसरे आज मैं नहीं याद करता तुम्हें | जाने कहाँ हो तुम बरस बीते | पीता हूँ सिगरेट ढूँढता हडबडाकर माचिस जाकर खड़ा हो जाता खिड़की के पास | सूर्यास्त | अब मैं नहीं याद करता तुम्ह... [पूरी पोस्ट]
writer धीर.
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[27 Nov 2009 01:10 AM]

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