भारती भोजन की विडंबना
काम ही ऐसा है की सारे देश में घूमते रहो,यायावर। और भूखे पेटन हो भजन गोपाला। पौ फटते दन्त पंक्ति को मांजसुबह से इस दिशा में सजग हो जाते हैं। जिस भी होटल में रुकता हूँ वहां ब्रेक फास्ट आठ बजे तक लग जाता है। यहीं से भोजन की राजनीती शुरू हो जाती है। दक्ष...
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rajkumar jha
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[26 Nov 2009 20:30 PM]



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