अब न रही वो मधुशाला...
ये महान दृष्य है/चल रहा मनुष्य है/अश्रु स्वेद रक्त से/लथ-पथ,लथ-पथ,लथ-पथ... हरिवंश राय बच्चन ने ये पंक्तियां एक अर्सा पहले जिंदगी के लिए इंसानी जद्दोजहद पर लिखीं थी। बच्चन जी चले गए लेकिन अग्निपथ पर आदमी की यात्रा अभी भी जारी है। ये बात अलग है कि आम आ...
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हिमांशु बाजपेयी
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[26 Nov 2009 14:34 PM]



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