मेरी बच्ची
तुझे दूँगी वो सारी खुशियाँ जो मुझे नहीं मिलीं तेरी ज़िन्दगी को ऐसे मैं संवारुँगी तुझे रखूँगी पलकों की छाँव में ग़म की हर धूप से बचा लूँगी कैसे बचाउँगी शैतानों की नज़रों से तुझे अभी से सोचकर डर लगता है कि मेरी ही तरह तुझे भी जाने क्या-क्या सहना होगा प...
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mukti
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[26 Nov 2009 13:54 PM]



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