मेरी बच्ची

feminist poems तुझे दूँगी वो सारी खुशियाँ जो मुझे नहीं मिलीं तेरी ज़िन्दगी को ऐसे मैं संवारुँगी तुझे रखूँगी पलकों की छाँव में ग़म की हर धूप से बचा लूँगी कैसे बचाउँगी शैतानों की नज़रों से तुझे अभी से सोचकर डर लगता है कि मेरी ही तरह तुझे भी जाने क्या-क्या सहना होगा प... [पूरी पोस्ट]
writer mukti

बेटियाँ

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[26 Nov 2009 13:54 PM]

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