वो भयानक दिन
आज वो खूनी मंजर फ़िर याद आ गया सब की आंखों को फ़िर से वो बरसा गया। मांएं इंतजार में बैठी बस नजरें बाट जोह रही विधवायें सूनी मांग लिये हर कोने में सिसक रहीं। बेबस अनाथ बच्चे जैसे अपनों को भीड़ में ढूंढ़ रहे खो चुके जो अपनी पहचान खुद अपना परिचय पूछ रहे। कह...
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JHAROKHA
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[26 Nov 2009 12:27 PM]



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